जिंदगी और मौत के बीच का सच ........ पिसता हुआ खुद का वजूद !!
Bahot shukriya MUkesh ji
कोई ख़ला जब माहौल में शोर के बीच बनी दरारों में बैठने लगती है , तो यूं लगता है, बेचैनी को शायद लम्हाती क़रार आने लगा है , शायद होंठ जब चुप...
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Bahot shukriya MUkesh ji
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