कोई ख़ला जब माहौल में शोर के बीच बनी दरारों में बैठने लगती है , तो यूं लगता है, बेचैनी को शायद लम्हाती क़रार आने लगा है , शायद होंठ जब चुप हो तो ज़हन के पास नमालूम सवाल नहीं होंगे , जवाबों की मशक्कत भी नही होगी , मगर एक कभी ख़त्म ना होने वाला सिलसिला होता है , जो बस सवालों की फेहरिस्त में उलझा अपने होने का मक़सद तलाशता रह जाता है, और ऐसा निगाह ए हद में दूर तक नहीं होता जो जवाब दे सके ।
Thursday, November 23, 2023
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कोई ख़ला जब माहौल में शोर के बीच बनी दरारों में बैठने लगती है , तो यूं लगता है, बेचैनी को शायद लम्हाती क़रार आने लगा है , शायद होंठ जब चुप...
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~~क्वारन्टाइन में एक माँ~~ कौन सी नज़र, नज़र ए आख़िर थी ये उस चौखट के सीने मे धसी आखरी ख्वाइश सी बेताब नज़र की गवाही मे ...
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Until death... Am weaving red colour on my curves.... The silhouettes of me, come alive in palpitating nerves To kiss his ga...
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मुझे जुनून की हद के पार ले जाने को तेरी मुहब्बत का आगाज़ ही काफ़ी है. जो थपक दे मेरे रोते बिलखते दर्द को ऐसे सुकून को तेरा सीना...
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