Thursday, November 23, 2023

 जब आपके हाथों से दुनिया की रफ़्तार छूट रही हो, और सफ़र अपने अंदर, अपनी ही जानिब हो, आपका होना आपके कदमों तले जमा होने लगे , होना बेमक़सद हो जाए और जो होना चाहते हैं , वो नामालूम सी कसक सा पहरों पहर चुभता सा हो ,तो कैसी कैफियत होती है?? वैसी ही है !!

जब रोशनी इतनी हो कि अंधेरा भी नज़र ना आए , और अंधेरे भी बेख़बरी के आलम का ही हिस्सा हों , जब किसी के हाल पूछने पे आंसू भी ना आते हों, जब ख़ुदा की दहलीज़ की जानिब सफ़र हो, मगर ख़ुदा रास्ता ना बताता हो, तो कैसी कैफ़ीयत होती है? वैसी ही है !!
जब अपने अंदर सफ़र करते हुए किसी दूसरे सफ़र की उम्मीद में , क़दम तो आगे बढ़ चुके हों , मगर दूजा पांव रास्ता मांगे, और रास्ता अपने पांव खींच ले , और मायूस होके लौटना चाहो , और अपना आप भी ख़ुद को तस्लीम न करे, तो कैसी कैफ़ीयत होती है?? वैसी ही है !!

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