Thursday, April 9, 2015



तेरे होंठो पर आवाज़ मे ढल के
तेरी सांसो को पीकर
लफ्ज़ ज़िंदा हुए मेरे
जज़्बातों को शनासाई मिली
हसरतों को गवाही मिली....
ज़ुदा हुए
हवा हुए
खुश्बू बने
आरज़ू हुए
तेरे होंठो की दरारों मे जब
लफ्ज़ पिन्हां हुए मेरे...
अब्र बने
दुआ हुए...
अदा हुए
रीदा हुए...
लफ्ज़ तबीर बने मेरे....

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